चारों ओर समुद्र से घिरे मॉरीशस का मौसम रहता है सुहाना
13 Jul 2017
मॉरीशस दुनिया के सबसे खूबसूरत देशों में से एक है। इसे देखने का पूरी दुनिया में एक जैसा क्रेज है। मॉरीशस में चप्पे-चप्पे पर प्रकृति के सौंदर्य का जादू सिर चढ़कर बोलता है। इसी कारण मॉरीशस को ड्रीमलैंड के नाम से भी जाना जाता है। नवदंपतियों के लिए आज भी मॉरीशस से बढ़कर दूसरा हनीमून डेस्टिनेशन नहीं। मॉरीशस स्थित नेशनल उर्दू इंस्टीट्यूट से दूसरे विश्व उर्दू सम्मेलन में भाग लेने के लिए न्योता मिला। भारत के प्रमुख साहित्यकारों व शिक्षाविदों के साथ बतौर सांस्कृतिक राजदूत एयर मॉरीशस की फ्लाइट से लगभग 7 घंटे की उड़ान के बाद हम मॉरीशस पहुंचे। मॉरीशस के एयरपोर्ट पर उतरने से लेकर वहां के विविध कार्यक्रमों में भागीदारी के बीच, कहीं भी और कभी भी, हमें यह महसूस नहीं हुआ कि हम अफ्रीका के दक्षिणी पूर्वी छोर पर बसे एक छोटे से द्वीप पर मौजूद हैं बल्कि हर कदम पर हमें यही लगा कि यह भारत का ही दूसरा रूप है। भारत का दूसरा रूप मॉरीशस में भारतीयों की संख्या लगभग आठ लाख है। जाहिर है कि यहां भारतीय पर्यटक बेहद अपनापन महसूस करते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि यहां अंग्रेजी, क्रियोल, फ्रेंच भाषाओं के अलावा हिंदी और भोजपुरी का भी बोलबाला है। मॉरीशस हिंद महासागर में मेडागास्कर से लगभग 500 मील पूर्व में स्थित है। यहां सबसे पहले अरब 10वीं सदी में आए। 1400 ई. में मलय और 1500 ई. में यहां पुर्तगालियों का आगमन हुआ। सन् 1598 में यहां डच लोगों ने शासन किया। सन् 1721 में यहां पर फ्रांसीसियों का आधिपत्य कायम हुआ फलस्वरूप यहां अफ्रीकी गुलामों का आयात प्रारंभ हुआ। सन् 1810 में मॉरीशस पर ब्रिटेन का कब्जा हो गया। ब्रिटिश हुकूमत 1968 तक कायम रही। 12 मार्च 1968 को मॉरीशस स्वतंत्र हुआ। पहले तो यह ब्रिटेन की राजसत्ता से जुड़ा रहा फिर 1992 में गणतंत्र के रूप में स्थापित हुआ। मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई है। 2,040 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में फैले मॉरीशस की जनसंख्या 12.51 लाख है। 83 फीसदी साक्षरता वाले इस देश में हिंदू, ईसाई और इस्लाम धर्म के अनुयायी निवास करते हैं। इसके पूर्व में सपाट भाग व मध्य को पठारों ने घेर रखा है। दक्षिण में मुख्यतया पहाड़ हैं। यहां का सामान्य तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहता है। मॉरीशस में यदा-कदा तूफान आते रहते हैं, जबकि यहां की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है। अर्थव्यवस्था एकमात्र गन्ने की फसल पर निर्भर है। शीरे, चाय और तंबाकू का निर्यात किया जाता है। जबकि पर्यटन मॉरीशस का तेजी से बढ़ता हुआ उद्योग है। डोडो नामक खूबसूरत पक्षी के कारण भी विख्यात है। डोडो सिर्फ यहीं पर पाया जाता है, जो अब विलुप्त हो चुका है। मॉरीशस में आज भी विशालकाय कछुए मिलते हैं, जिन पर बैठकर आप सवारी कर सकते हैं। हिंद महासागर से घिरे इस द्वीप की उत्पत्ति ज्वालामुखी के लावे से हुई। इसके अतिरिक्त कोरल रीफ (प्रवाल भित्ति) से घिरे इस छोटे से देश में अनेक लैगून हैं। सम्मोहक दृश्य विशाल केंद्रीय पठार, उष्ण कटिबंधीय वन, नदियां, नहरें और झरने इस स्थान की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। मॉरीशस के खूबसूरत समुद्री किनारे देखने लायक हैं। नीलम की तरह सौम्य लीलिमा लिए नीले समुद्र से घिरा मॉरीशस एक ऐसा द्वीप है, जहां के सुंदर रेतीले बीच पर्यटक को सम्मोहित कर लेते हैं। यहां उपलब्ध मौज-मस्ती पर्यटकों को बार-बार यहां आने के लिए ललचाती है। मॉरीशस के उत्तरी प्रांत में पेरी-बेरी, ग्रांडबाई आदि खूबसूरत बीच हैं, तो दक्षिण में ब्लू-बे बीच देखने लायक है। पश्चिम तट पर स्थित प्लिक इन लैक बीच पर्यटकों को आकर्षित करता है, जबकि पूर्वी तट पर स्थित इल ऑक्स सफर्स के तो क्या कहने। नीले समुद्र का जादू यहीं खत्म नहीं होता। सागर के अंदर छुपी दुनिया का लुत्फ उठाने के लिए ब्लू सफारी पनडुब्बी आपकी सेवा में हाजिर है। समुद्र की अनजानी, रहस्यमयी दुनिया को दिलचस्प ढंग से जानने के लिए पैरासेलिंग से बेहतर विकल्प नहीं है। पैरासेलिंग में एक टैक्सी बोट आपको समुद्र के अंदर ले जाती है और वहां डेढ़ घंटे तक आप भरपूर मनोरंजन करते है। मछलियां पकड़ने का शौक हो तो यहां होटलों और रेस्तरांओं में तमाम उपकरणों से लैस नाव मिल जाती है, जिसमें बैठकर टूना, सेलफिश, शार्क आदि मछलियां पकड़ी जा सकती हैं। समुद्र का ज्यादा आनंद उठाने के लिए क्रूज नावों का भी बंदोबस्त है। समूद्र की सैर के बाद यहां की सुंदरतम धरा भी आपके स्वागत के लिए तत्पर है। कसेला के पक्षी गार्डन में आकर आपको लगेगा कि आप प्रकृति की गोद में बैठे हैं। यहां का नेशनल पार्क भी घूमने लायक है। वहां की मखमली घास पर बैठकर लंच करने का आनंद भुलाये नहीं भूलता। कसेला के पक्षी गार्डन में 140 प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं। यहां का मुख्य आकर्षक दुर्लभ मॉरेशियाई गुलाबी कबूतर हैं। लावेनिले मगरमच्छ, मेंढक, बंदर और कछुआ अभ्यारण्य भी कम दिलचस्प नहीं। यहां का कछुआ पार्क और वैलीना मगरमच्छ उद्यान भी देखने लायक है। डॉमेन डुचेयर नामक प्राणी उद्यान में हिरन और जंगली सुअर रखे गए हैं। यहां शिकार की अनुमति है। अगर आप जल की रानी मछली से मिलना चाहते हैं तो पोएनटि-ऑक्स-पिमेन्ट्स ट्राऊ-ऑक्स-बिचेस मछली उद्यानों में जाया जा सकता है। जब प्राणी जगत से ऊब होने लगे, तो आप जॉरडिन बोटेनिक डि पैंपमाउलेज और डोमेन लेस पेल्लेस आदि पार्को में जा सकते हैं। यहां विभिन्न किस्म के सुंदर फूल और पेड़-पौधे किसी भी पर्यटक का मन मोह लेने की क्षमता रखते हैं। टेमेरिन झरने को देखे बिना मॉरीशस से वापस आना अधूरा है। यहां आने वाले पर्यटक ट्राऊ-ओऊ-सर्फ नामक विलुप्त ज्वालामुखी जरूर देखते हैं। यहां की सर्वाधिक आकर्षक और अद्भुत जगह है चमेरिल के सतरंगी पहाड़। जो पर्यटक ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व के स्थानों को घूमने के शौकीन हैं, उनके लिए मार्टेलो टावर, सोउलिक और राजधानी पोर्ट लुई आदर्श स्थल हैं। थ्रिल, रोमांच, मौज-मस्ती जो पर्यटक थ्रिल, रोमांच और मौज-मस्ती भरा पर्यटन चाहते हैं, उनके लिए वाटर पार्क सुंदर जगह है, जहां मनोरंजन के समस्त साधन उपलब्ध हैं। ब्लैक हॉल, ज्वाइंट स्लाइड्स किड्स पूल जैसे असंख्य रोमांचक झूले यहां हैं। यहीं नहीं रौड्रिक्स द्वीप पर हाईकिंग, ट्रैकिंग, माउंटेन बाईकिंग, फिशिंग आदि का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। नौजवानों के लिए विशेष रूप से घुड़दौड़, गो-कार्टिग आदि का पर्याप्त प्रबंध किया गया है। घुड़दौड़ यहां का लोकप्रिय खेल है, जोमेडन कप के लिए दुनिया भर में चर्चित है। द ट्रायोलेट शिवाला मॉरीशस का सबसे बड़ा गांव है। हिंदु धर्मावलंबियों में यह खासी आस्था का केंद्र है। वर्ष 1819 में निर्मित यहां का महेश्वर नाथ मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इसमें भगवान शिव, कृष्ण, विष्णु, ब्रह्मा और गणेश की दुर्लभ प्रतिमाएं स्थापित है। मॉरीशस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक विरासत को समेटे यहां का विक्टोरिया 1840 संग्रहालय पर्यटकों को रूबरू कराता है। अगर आप मॉरीशस जा रहे हैं, तो माहेबुर्ग गांव जरूर जाएं। यहां इस द्वीपीय देश की सर्वाधिक प्राचीन इमारतें आज भी मौजूद है। यहां के कैसीनो, पब, डांस क्लब आदि गेस्ट हाउसों के अतिरिक्त समुद्री किनारों पर स्थित विभिन्न होटल, अनेक बंगले, स्टूडियो और विलास ऐसे स्थान हैं, जहां पर्यटकों के रहने, खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध है। मॉरीशस में पिछले कुछ वर्षो से साहित्यिक गतिविधियों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। उर्दू स्पीकिंग यूनियन और द नेशनल उर्दू इंस्टीट्यूट के चेयरमैन शहजाद ए. अहमद और महासचिव फारूक बाऊचा द्वारा आयोजित द्वितीय विश्व उर्दू कांफ्रेंस इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था, जिसमें उन्होंने दुनिया भर के साहित्य प्रेमियों को इकट्ठा करके सिर्फ न उर्दू के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, बल्कि हिंदी के लोगों को भी उससे जोड़कर नई मिसाल कायम की। वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति अनिरूद्ध जगन्नाथ और वहां के उपराष्ट्रपति अब्दुल रऊफ बंधन ने हमारे प्रतिनिधिमंडल की जिस तरह से आवभगत की, उसे हम कभी नहीं भुला सकेंगे। यही नहीं वहां के कला व संस्कृति मंत्री मोती राम दास, उपप्रधानमंत्री व वित्त मंत्री पॉल रेमण्ड बेरेंगर आदि ने दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों का जिस तरह से स्वागत सत्कार किया वह वहां की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। मॉरीशस में पोर्ट लुई स्थित हिंदी स्पीकिंग यूनियन भी भारत की संस्कृति व सभ्यता के उत्थान में महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा है। संगठन द्वारा सुमन नाम से निकाली जाने वाली पत्रिका भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। कुल मिलाकर मॉरीशस एक ऐसा देश है, जहां चप्पे-चप्पे पर हमें भारतीयता की अमिट छाप देखने को मिली। दुनिया के बाकी देशों से आए प्रतिनिधियों के अनुभव कैसे रहे पता नहीं, लेकिन हां मुझे जब-जब भी मौका मिलेगा मैं मॉरीशस जाना चाहूंगा, क्योंकि मेरे दिल के तार वहां की धरती से जुड़े हैं। मॉरीशस के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से सप्ताह में दो दिन (बृहस्पतिवार और रविवार) को एयर मॉरीशस की फ्लाइट उपलब्ध हैं। खर्च एयर मॉरीशस का आने-जाने का हवाई किराया लगभग 30 हजार रुपये प्रति व्यक्ति है। ग्रुप में जाने पर इसमें रियायत भी मिल जाती है। मुद्रा मॉरीशस की मुद्रा रुपया है। जो भारतीय रुपये से अलग है। मॉरीशस में वहां के लगभग 24 रुपये के बदले आप एक डालर खरीद सकते हैं। कब जाएं मॉरीशस जाने के लिए यूं तो पूरे वर्ष मौसम ठीक रहता है। लेकिन जून से अगस्त और दिसंबर से फरवरी के महीने पर्यटकों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। मॉरीशस के बारे में एक बात समझ लेनी चाहिए कि वहां भारत की तरह न तो कड़ाके की ठंड पड़ती है और न ही चिलचिलाती गर्मी। औसतन वहां का तापमान 22से 34 डिग्री सेल्सियस रहता है। यहां जून से सितंबर का महीना सुरमई सर्दियों वाला होता है। जिसमें हल्के ऊनी कपड़ों की जरूरत पड़ती है। चूंकि साफ-सफाई और तौर-तरीकों के मामले में मॉरीशस एक अंतर्राष्ट्रीय मानकों वाला राष्ट्र है, अतः सामान्य औपचारिकताओं और सावधानियों का ध्यान रखें। भारत का देशी स्टाइल वहां न चलेगा। कार रेंटल मॉरीशस में आप स्थानीय भ्रमण के लिए लोकल टैक्सियां किराये पर ले सकते हैं। आपको मॉरीशस जाने से पूर्व एक अस्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा कर अपने साथ ले जाना पड़ेगा। मॉरीशस में भीड़भाड़ कम है और वहां आवासीय क्षेत्रफल भी बहुत कम है। जिन लोगों को लांग ड्राइव का मजा लेना है, उनके लिए मॉरीशस उपयुक्त व आदर्श स्थल है। कहां ठहरें मॉरीशस में पर्यटकों के रुकने के पर्याप्त इंतजाम हैं। लगभग सभी बड़े होटल समूहों के होटल यहां उपलब्ध हैं। मॉरीशस में रुकने के लिए एक हजार रुपया प्रतिदिन से लेकर 15 हजार रुपया प्रतिदिन तक के रूम उपलब्ध हैं। आना-जाना मॉरिशस के लिए भारत से कई एयरलाइंस की सीधी सेवाएं हैं। मॉरिशस के चारों ओर समुद्र होने से कहीं आने-जाने के लिए रेल की व्यवस्था नहीं है। आप किराये पर टैक्सी लेकर घूम सकते हैं। अगर आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस है तो कार लेकर स्वयं भी चला सकते हैं। भाषाएं यहां मुख्य राजभाषा फ्रेंच और अंग्रेजी है। वैसे हिंदी अधिकतर लोग आसानी से बोलते और समझते हैं। इसके अलावा यहां भोजपुरी, तमिल, मराठी, उर्दू, मैंडरिन व कैंटोनीज भाषा का भी प्रयोग होता है। यहां बोलचाल की एक स्थानीय भाषा क्रियोल भी है। मौसम मौसम अकसर यूरोपियन देशों की तरह बदलता रहता है। दिन में गर्मी महसूस होती है, तो शाम 4-5 बजे से ठंडी हवा के झोंके ठंड की याद दिला देते हैं। गर्मी का मौसम नवंबर से मार्च तक माना जाता है। मॉरिशस जाने के लिए आम तौर पर जून से सितंबर के बीच का मौसम बेहतर माना जाता है। पर पिछले 7-8 वर्षो से यहां मौसम की परवाह छोड़ कर पूरे साल पर्यटकों का तांता लगा रहता है।

अन्य खबर