जाधव मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने लिखित दलीलें जमा करने की समय सीमा तय की
24 Jan 2018
हेग, 24 जनवरी (धर्म क्रान्ति)। कुलभूषण जाधव मामले में लिखित दलीलें जमा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भारत और पाकिस्तान के लिए क्रमश: 17 अप्रैल और 17 जुलाई की समय सीमा तय की है। पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव (47) को जासूसी और आतंकवाद के मामले में मृत्युदंड सुनाया है, जिसके बाद यह मामला मई में हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पहुंचा। अठारह मई को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की दस सदस्यीय पीठ ने इस मामले में निर्णय लेने तक पाकिस्तान को जाधव की सजा को तामील करने से रोक दिया था। संयुक्त राष्ट्र के इस प्रधान न्यायिक निकाय ने पिछले हफ्ते बयान जारी कर जाधव मामले में भारत को जवाब और फिर पाकिस्तान को उसका जवाब देने के लिए अधिकृत किया। बयान में कहा गया है कि अदालत ने इन लिखित दलीलों के लिए क्रमश: समय 17 अप्रैल, 2018 और 17 जुलाई 2018 की समय सीमा तय की है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने दोनों पक्षों के दृष्टिकोणों और मामले की परिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है।
पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाबलों ने जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को पिछले साल तीन मार्च को बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था, जाधव कथित रुप से ईरान से बलूचिस्तान में घुस गए थे। हालांकि भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया। भारतीय सेना से सेवानिवृत होने के बाद जाधव अपने कारोबार के संबंध में ईरान गए थे। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान ने जाधव को राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने की भारत की मांग खारिज कर दी थी और दावा किया था कि भारत अपने जासूस द्वारा एकत्र की गई खुफिया सूचनाओं के लिए उस तक पहुंचना चाहता है। पिछले महीने उसने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कहा था कि वियना संधि के तहत ऐसी सुविधा केवल वैध यात्रियों के लिए होती है, न कि जासूसों के लिए। हालांकि पाकिस्तान ने 25दिसंबर को इस्लामाबाद में जाधव की उसकी मां एवं पत्नी से मुलाकात करवाई थी। पाकिस्तान द्वारा जारी तस्वीरों में नजर आ रहा है कि शीशे के एक तरफ जाधव जबकि दूसरी तरफ उनकी मां और पत्नी बैठी हैं। उनके बीच इंटरकॉम से बातचीत हो रही है। बाद में भारत ने पाकिस्तान पर सुरक्षा के बहाने जाधव की मां एवं पत्नी से मंगलसूत्र, चूड़ियां और बिंदी हटवा कर उनके परिवार के सदस्यों की सांस्कृतिक एवं धार्मिक संवेदनाओं का अपमान करने का आरोप लगाया था।

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