छापेमारी से ध्यान हटाने के लिए केजरीवाल ने मानहानिकारक बयान दिए: जेटली

नई दिल्ली, 07 मार्च (धर्म क्रांति)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि पिछले साल दिसंबर में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी के कार्यालय पर छापेमारी की गई थी, जिससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए केजरीवाल ने मानहानिकारक बयान दिए थे। केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी द्वारा जिरह के दौरान जेटली ने कहा, ऐसा लगता है कि बचाव पक्ष (केजरीवाल तथा अन्य) ने उस छापेमारी के तत्काल बाद मेरे खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणियां कीं। उनकी मंशा इस छापेमारी से लोगों का ध्यान भटकाने की थी और किसी भी तरह विवाद से मेरा दामन जोड़ना था, जिससे मेरा कोई नाता नहीं था। जेटली की टिप्पणी जेठमलानी के यह कहने पर आई कि केजरीवाल के पूर्व प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर दिसंबर 2015 में इसलिए छापेमारी की गई थी क्योंकि इससे यह उम्मीद थी कि दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) से संबंधित दस्तावेज मिल जाएंगे। केजरीवाल तथा आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह, राघव चड्ढा तथा दीपक बाजपेयी के खिलाफ जेटली ने दिसंबर में मानहानि का मामला दर्ज कराया था। जेटली ने दावा किया था कि डीडीसीए से संबंधित एक मामले में उन्होंने उनके खिलाफ गलत तथा मानहानिकारक बयान दिए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। उन्होंने दावा किया कि आप नेताओं ने दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन में कथित तौर पर अनियमितता तथा वित्तीय गड़बड़ी को लेकर उन पर आरोप लगाए थे। जेटली लगभग 13 वर्षो तक डीडीसीए के अध्यक्ष रहे हैं। जेठमलानी ने जेटली ने कहा कि वह इस बात से अवगत थे या नहीं कि दिल्ली सरकार विवाद की जांच के लिए एक आयोग की नियुक्ति कर रही है। जेटली ने कहा कि उन्होंने साल 2013 में ही पद को छोड़ दिया था। उन्होंने कहा, इस एसोसिएशन की गतिविधियों में न तो मेरी कोई दिलचस्पी थी और न ही उसके बारे में कोई जानकारी थी। मुझे इस तरह की जांच के बारे में नहीं पता था। मामले की सुनवाई मंगलवार को जारी रहेगी।