सभी मुसलमानों को एक चश्मे से नहीं देखें: शबाना

लंदन/नई दिल्ली, 15 मार्च (धर्म क्रांति)। हिंदी सिनेमा की जानीमानी अभिनेत्री शबाना आजमी ने ‘तुच्छ राजनीतिक फायदों’ के लिए सभी मुसलमानों को एक चश्मे से देखने को लेकर आगाह करते हुए कहा कि इससे किसी व्यक्ति की पहचान के विकास में संस्कृति की जटिल परतों को नकाराने की स्थिति पैदा होगी। ब्रिटिश संसद परिसर में आयोजित एक समारोह में मंगलवार को शबाना ने कहा, ‘मुझे किसी एक नजरिए से मत देखिए, अपनी इच्छा के मुताबिक मुझे सीमित करने का प्रयास मत करिए। तुच्छ राजनीतिक फायदों के लिए माहौल का ध्रुवीकरण मत करिए और लोगों को ‘आदर्श समुदाय’ बनाने के लिए विवश मत करिए। आदर्श समुदाय जो महिला, दलित, आदिवासी अथवा किसी अन्य नाम से हो सकता है जिसका इस्तेमाल मुझे ‘अलहदा’ महसूस कराने के लिए किया जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर आप मुझसे पूछते हैं कि मैं कौन हूं तो मैं कहूंगी कि मैं महिला हूं, भारतीय हूं, बेटी हूं, पत्नी हूं, मुस्लिम हूं, कार्यकर्ता हूं।’ अभिनेत्री ने कहा, ‘मुसलमान होना मेरी पहचान का सिर्फ एक पहलू मात्र है, लेकिन लगता है कि पूरी दुनिया में यह प्रयास किया जा रहा है कि पहचान को सिर्फ धर्म के दायरे में रख दिया जाए, जिसमें मैं अपनी पहचान के बाकी तमाम पहलुओं के साथ पैदा हुई।’ उन्होंने कहा, ‘तमाम मुसलमानों को एक रंग में रंग देने से एक व्यक्ति की पहचान को आकार देने वाली संस्कृति की जटिल परतें कम होने की स्थिति पैदा हो सकती है। मेरे लिए मुसलमान होने का मतलब है उर्दू, बिरयानी, ईद, उर्दू जबान और मेरी गंगा जमनी तहजीब, मेरी मिला जुला संस्कृति।’ ‘मैं भारतीय मुस्लिम हूं और मैं सऊदी अरब के मुस्लिम के साथ कोई लगाव महसूस नहीं करती। मैं मेरे भारतीय हिंदुओं, भारतीय इसाइयों और भारतीय सिख दोस्तों के साथ कहीं ज्यादा अपनाइयत महसूस करती हूं। हमारा साझा इतिहास है, साझा पहचान है और साझा मुस्तकबिल है।’