*संत कबीर की समाधि पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने
06 Jun 2022
*संत कबीर की समाधि पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने टेका माथा,बताया सांप्रदायिक एकता की दुर्लभ मिसाल*

संतकबीरनगर।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कहा कि संत कबीर ने समाज को समानता और समरसता का मार्ग दिखाया,कुरीतियों,आडंबरों,भेदभाव को दूर करने के लिए प्रेरित किया,कमजोरों के प्रति संवेदना और और असहायों की सेवा पर निरंतर जोर दिया।कोविंद ने कहा कि समाज के कमजोर लोगों के प्रति संवेदना रखे बिना और असहायों की सेवा किए बगैर समरसता नहीं आ सकती।उनका समूचा जीवन सांप्रदायिक एकता का संदेश देता रहा।आज एक ही परिसर में उनकी समाधि और मजार का होना सांप्रदायिक एकता की दुर्लभ मिसाल है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद,राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ रविवार सुबह मगहर के कबीर चौरा परिसर में स्थित संत कबीर की समाधि पर माथा टेकने, पौधरोपण करने के बाद यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।इस अवसर पर उन्होंने संत कबीर अकादमी एवं शोध संस्थान तथा इंटरप्रेटेशन सेंटर का लोकार्पण भी किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मगहर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच से बटन दबाकर महान समाज सुधारक संत कबीर की साधना एवं निर्वाण स्थली मगहर में 31.49 करोड़ रुपए की लागत से बने संत कबीर अकादमी एवं शोध संस्थान, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 17.61 करोड़ रुपए की लागत वाले इंटरप्रेटेशन सेंटर का लोकार्पण किया।इस अवसर पर 37.66 लाख रुपए की लागत से कराए गए कबीर निर्वाण स्थली के सौंदर्यीकरण कार्यों का भी लोकार्पण हुआ।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि संत कबीर इस अंधविश्वास को तोड़ने के लिए काशी से मगहर आए थे कि काशी में मृत्यु से स्वर्ग प्राप्त होता है और मगहर में मृत्यु से नरक।ऐसा लगता है कि मानो वह अकाल से त्रस्त लोगों का जीवन संवारने के लिए ही मगहर आए थे।संत कबीर एक सच्चे पीर थे। कबीर सोई पीर है जो जाने पर पीर

राष्ट्रपति ने कहा कि संतों के आगमन से धरती पवित्र हो जाती है। इसका प्रमाण मगहर की धरती है। यहां लगभग 3 वर्ष तक संत कबीर दास रहे।उनके आगमन से यह भूमि पूरी तरह से खिल उठी। यहां पर जल का अभाव था,लेकिन संत कबीर दास के निवेदन पर गोरक्षपीठ के एक संत यहां आए और उनके प्रभाव से यहां का तालाब जल से भर गया और गोरख तलैया से सूखी पड़ी आमी नदी जीवंत हो उठी। मानव जीवन को सुधारने के लिए कबीरदास मगहर आए थे। वह सच्चे भक्त थे और लोगों की पीड़ा को समझते थे। उसे दूर करने के उपाय भी करते थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि कबीर एक गरीब परिवार में पैदा हुए, लेकिन उन्होंने कभी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं समझा बल्कि उसे अपना ताकत बनाया। वह कपड़ा बुनने का काम करते थे। उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। उस समय विभाजित समाज में समरसता लाने का उन्होंने प्रयास किया। समरस परिवार की चादर बुनी और उस चादर को कभी मैली नहीं होने दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह देश हमेशा ही अपने में सुधार के लिए तत्पर रहा है।इसी कारण जब दुनिया में बड़ी-बड़ी सभ्यताओं का नामोनिशान मिट गया, भारत हजारों वर्ष की अटूट विरासत को लेकर अपने पांव पर मजबूती से खड़ा है।

कबीर धरा पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति और राज्यपाल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संतकबीर की परिनिर्वाण स्थली पर राष्ट्रपति के कर कमलों से आज कई कार्यों का लोकार्पण हो रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मगहर में बुनियादी सुविधाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा व रोजगार सृजन को लेकर पर्यटन विकास के कार्य आगे भी होते रहेंगे।

सीएम योगी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष पर कहा कि हमें अगले 25 वर्ष का लक्ष्य तय करना है और इन लक्ष्यों से हर एक नागरिक को जुड़ना होगा। उन्होंने ‘काल करे सो आज कर, आज करे सो अब’ से लोगों को प्रेरित किया कि टालमटोल से बचें और कर्मपथ पर आगे बढ़ते हुए समाज, प्रदेश और देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने किया।इस अवसर पर कबीर मठ मगहर के महंत विचार दास, संतकबीर नगर के सांसद प्रवीण निषाद भी मौजूद रहे।

अन्य खबर