स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर भड़के रामनगरी के संत, लतखोर बताकर शास्त्रार्थ के लिए किया आमंत्रित
24 Jan 2023, 25
स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर भड़के रामनगरी के संत, लतखोर बताकर शास्त्रार्थ के लिए किया आमंत्रित

अयोध्या।समाजवादी पार्टी के नेता व चुनावी वैज्ञानिक स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर रामनगरी अयोध्या के संतो ने कड़ी नाराजगी जताई है।संतो ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य पहले रामचरितमानस को पढ़ें।

तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बाध्य नहीं किया जा रहा कि वह रामचरितमानस पढ़े।अगर स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस की चौपाई का एक भी अर्थ बता दें, तो मैं जानूं, अगर नहीं बता सकते हैं, तो उन्हें रामचरितमानस पर उंगली उठाने का अधिकार नहीं है।इस दौरान लतखोर शब्द का भी इस्तेमाल किया गया।परमहंस दास ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके बाद भी उंगली उठाएंगे, तो इसका परिणाम बेहतर नहीं होगा।

स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान को लेकर रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य लतखोर हो चुके हैं।वह पहले भाजपा में थे, उन्हें भगाया गया तो समाजवादी पार्टी में चले गए।वह इधर से उधर घूम रहे हैं। सत्येंद्र दास ने सपा मुखिया अखिलेश यादव से मांग की है कि भगवान को ना मानने वाले और रामचरितमानस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले लतखोर व्यक्ति को तत्काल सपा से बाहर निकालें,अन्यथा सपा पर भी इसका आरोप लगेगा।भगवान राम को मानने वाले लोग आपसे दूरी कर लेंगे।

सत्येंद्र दास ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य को जनता ने नकार दिया है।वह चुनाव लड़े थे और हार गए हैं।भगवान राम के चरित्र का वर्णन राम चरित्र मानस में है।ऐसे आदर्श पुरुष भगवान राम के चरित्र को प्रतिबंधित करने की मांग स्वामी प्रसाद मौर्य कर रहे हैं,उनके सामान मूर्ख कोई नहीं है।

परमहंस दास ने कहा कि जिसकी इच्छा हो वो रामचरितमानस पढ़े।अगर इच्छा न हो तो न पढ़े,लेकिन बिना जाने टिप्पणी नहीं करना चाहिए।मजहब और पंथ के विषय में बोलने की औकात स्वामी प्रसाद मौर्य की नहीं है। स्वामी प्रसाद मौर्य की बयानबाजी अच्छी नहीं है।परमहंस दास ने कहा कि पहले वह अपने बयान को दुरुस्त करें।अगर उनको लगता है कि वो रामचरितमानस के विषय में जानते हैं, तो मैं शास्त्रार्थ के लिए उन्हें आमंत्रित करता हूं। जहां चाहे वह शास्त्रार्थ कर सकते हैं। परमहंस दास ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बिना जाने रामचरितमानस पर उंगली उठाएंगे, तो फिर उसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

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