मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के आधुनिकीकरण की जरूरत % योगी आदित्यनाथ
19 Jan 2018
लखनऊ, 19 जनवरी (धर्म क्रान्ति)। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रियों के पहले क्षेत्रीय विकास समन्वय सम्मेलन का लखनऊ में उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी सहित देश के 9 राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री इस समन्वय सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे।

भेदभाव से उपेक्षित महसूस करता है व्यक्ति

विधानभवन के तिलक हॉल में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम की शुरुआत के मौके पर अपने सम्बोधन में कहा कि जब हम अल्पसंख्यक कल्याण की बात करते है तो हमारे सामने बहुत सारे सवाल खड़े होते हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय पर बेहद अहम जिम्मेदारी है। अगर हमारे शरीर का कोई अंग काम करना बंद करता है तो हमें दिव्यांग कहा जाता है। अगर समाज में किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव होता है तो वो अपने आपको उपेक्षित महसूस करता है।

अल्पसंख्यकों के लिए 100 से ज्यादा योजनाओं की शुरुआत

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मुख्तार अब्बास नकवीके मंत्री बनने के बाद और यूपी में उनके आगमन के बाद यहां अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। उनकी सरकार के 9 महीने के कार्यकाल में ही 100 से अधिक कार्ययोजनाओं की शुरुआत अल्पसंख्यकों के लिए की गई है। राशन कार्डों का सत्यापन कराया गया और 37 लाख राशन कार्ड दिया गया है। बिना भेदभाव के सभी वर्ग के लिए काम किया गया। अल्पसंख्यक वर्ग के लिए प्रधानमंत्री स्किल डेवलपमेंट स्कीम चलाया जा रहा है। सीएम ने कहा कि मदरसों को बंद करना कोई हल नहीं। मदरसों का आधुनिकीकरण होना चाहिए। संस्कृत विद्यालयों को भी यही करना चाहिए। मदरसों को कम्प्यूटर से जोड़ना होगा। कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि हमेंध्यान रखना है कि कोई व्यक्ति अराजकता का शिकार न हो। वह अपने समाज के साथ मिलकर इस राष्ट्र को सशक्त बनाने और एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना में अपना योगदान दे सके।

9 राज्यों में मंत्री और अफसर रहे मौजूद

इस सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी सीधे तौर पर केंद्र की योजनाओं की स्थिति की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही सम्मेलन में अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में सुधार के लिए सुझाव मांगे गए। साथ ही राज्यों में चल रही अल्पसंख्यक योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, चंडीगढ़ और उत्तरप्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सम्मेलन में मौजूद रहे।

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