कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत की लंबी छलांग, 100वें स्थान पर पहुंचा
02 Nov 2017
वाशिंगटन/नई दिल्ली, 02 नवंबर (वेबवार्ता)। भारत ने विश्वबैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट रैंकिंग में लंबी छलांग लगायी है। देश की रैंकिंग 30 पायदान सुधरकर 100वें स्थान पर पहुंच गयी। इससे उत्साहित सरकार ने सुधारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया जिससे देश आने वाले वर्ष में कारोबार सुगमता के मामले में शीर्ष 50 देशों में शामिल हो सकता है। नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के समय भारत की रैंकिंग 142 थी। पिछले साल यह 130 थी। इस साल भारत एकमात्र बड़ा देश है जिसने कराधान, निर्माण परमिट, निवेशक संरक्षण और ऋण शोधन के लिये उठाये गये कदम के दम पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। विश्व बैंक ने कहा कि इस साल के आकलन में यह शीर्ष 10 सुधारकर्ता देशों में एक है। कारोबार सुगमता के 10 संकेतकों में से आठ में सुधारों को क्रियान्वित किया गया। यह पहला मौका है जब भारत इस मामले में पहले 100 देशों में शामिल हुआ है। इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार सुधार, निष्पादन और रूपांतरण के मंत्र के साथ रैंकिंग में और सुधार तथा आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कारोबार सुगमता में भारत की रैंकिंग में उछाल की सराहना की और कहा कि यह चौतरफा तथा विविध क्षेत्रों में किये गये सुधारों का नतीजा है। नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, व्यापार सुगमता के मामले में हमने जो रैंकिंग हासिल की है, यह अब तक का सबसे बड़ा उछाल है। यह भारत के लिये काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले तीन-चार साल से हम रैंकिंग से संबद्ध सभी 10 मानदंडों में सुधार की कोशिश कर रहे थे ताकि देश में कारोबार करना आसान हो। अपनी सालाना रिपोर्ट डूइंग बिजनेस 2018ः रिफार्मिंग टू क्रिएट जॉब्स में विश्वबैंक ने कहा कि भारत की रैंकिंग 2003 से अपनाये गये 37 सुधारों में से करीब आधे का पिछले चार साल में किये गये क्रियान्वयन को प्रतिबिंबित करता है। हालांकि, व्यापार माहौल के आकलन के लिये जून को आखिरी महीने के रूप में लिया गया है। इससे रैंकिंग में जीएसटी क्रियान्वयन के बाद के कारोबारी माहौल पर गौर नहीं किया गया है। इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से 1.3 अरब की आबादी वाला देश एक कर के साथ एक बाजार में तब्दील हुआ और व्यापार के लिये राज्यों के बीच की बाधाएं दूर हुई हैं। भारत पिछले साल 190 देशों की सूची में 130वें स्थान पर था। इस साल के आकलन में यह शीर्ष 10 सुधारकर्ता देशों में एक है। कारोबार सुगमता के 10 संकेतकों में से आठ में सुधारों को क्रियान्वित किया गया। यह पहला मौका है जब भारत इस मामले में पहले 100 देशों में शामिल हुआ है। विश्वबैंक की इस रिपोर्ट से नरेंद्र मोदी सरकार के तरकश में नये तीर आ गये हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय आयी है जब मोदी सरकार जीएसटी और नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में आयी नरमी को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। जेटली ने कहा, पिछले तीन साल में हम 142वें स्थान से 100 स्थान पर आ गये। और मुझे लगता है कि जिन क्षेत्रों में हम अब भी पीछे हैं, उनमें भी काफी प्रगति हो रही है। इसके आधार पर यह भरोसे किया जा सकता है कि हमारे पास अपनी स्थिति में और उल्लेखनीय सुधार लाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य शीर्ष 50 देशों में आने का है और यह प्राप्त किया जा सकता है। जेटली ने कहा, मुझे भरोसा है कि यह किया जा सकता है और इसीलिए तीन से चार क्षेत्र हैं जहां काम किया जाना है। हम पूरे दम-खम के साथ इसे आगे बढ़ाएंगे। देश में जिन मानदंडों में 2016-17 में सुधार हुआ है, उसमें कारोबार शुरू करने में तेजी, प्रक्रियाओं में कमी, कर्ज की आसान पहुंच, अल्पांश निवेशकों का संरक्षण, कर भुगतान, सीमा पार व्यापार को आसान बनाने तथा ऋण शोधन को सुगमत बनाना शामिल है। हालांकि कंपनी गठित करना, अनुबंधों को लागू करना और निर्माण परमिट के मामले में लेकिन इसके बावजूद भारत कारोबार शुरू करने, अनुबंध के लागू करने तथा निर्माण परमिट के मामले में अब भी पीछे है। नई कंपनी को पंजीकरण कराने में अब भी 30 दिन का समय लगता है जो 15 साल पहले 127 दिन था लेकिन स्थानीय उद्यमियों के लिये प्रक्रियाओं की संख्या जटिल बनी हुई है। उन्हें अब भी 12 प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता होती है। हालांकि भारत निवेशकों के संरक्षण के मामले में दुनिया में चौथे स्थान (पिछले साल 13वें स्थान) पर आ गया लेकिन बिजली प्राप्त करने के मामले में स्थिति बिगड़ी है और पिछले साल के 26 से 29वें स्थान पर आ गया। कर्ज उपलब्धता रैंकिंग 44 से सुधरकर 29 पर आ गयी। वहीं कर भुगतान सुगमता के मामले में रैंकिंग 172वें से सुधकर 119वें स्थान पर आ गयी। विश्वबैंक के ग्लोबल इंडिकेटर्स ग्रुप के कार्यवाहक निदेशक रीता रमाल्हो ने वाशिंगटन में कहा, यह बड़ा उछाल है। उन्होंने 30 पायदान के सुधार के लिये मोदी सरकार की अगुवाई में 2014 से किये गये सुधारों को श्रेय दिया। एक जुलाई से लागू माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अगले साल की व्यापार सुगमता रिपोर्ट में प्रतिबिंबित होगा। रीता ने कहा, इस साल जीएसटी सुधारों पर गौर नहीं किया गया। इस पर अगले साल की रिपोर्ट में विचार किया जाएगा। विश्वबैंक के अनुसार दुनिया में न्यूजीलैंड कारोबार के लिहाज से सबसे बेहतर जगह है। उसके बाद क्रमशः सिंगापुर, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया और हांगकांग का स्थान है। अमेरिका तथा ब्रिटेन सूची में क्रमशः छठे और सातवें स्थान पर हैं। ब्रिक्स देशों में रूस सूची में अव्वल है और वह 35वें स्थान पर है। उसके बाद चीन का स्थान है जो लगातार दूसरे साल 78वें स्थान पर है। रिपोर्ट लिखने वालों ने कहा कि यह इस साल का सबसे बड़ा आश्चर्य भारत है। उसकी रैंकिंग 30 पायदान सुधरी है। इस संदर्भ में उसका अंक 4.71 बढ़कर 60.76 अंक पहुंच गया। रीता ने कहा, भारत ने इस साल काफी सुधार किया है लेकिन अब भी काफी गुंजाइश है। इसीलिए मैं यह नहीं कहूंगी कि यह कारोबार के लिये बेहतर जगह है लेकिन निश्चित रूप से बेहतर जगह बनने की दिशा में बढ़ रहा है। दो साल पहले के मुकाबले कारोबार करना काफी आसान हुआ है।

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