आने वाले 10 साल में देश को रिकॉर्ड संख्या में मिलेंगे नए डॉक्टर
16 Apr 2022
(PBNS)
पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा, “देश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण का लक्ष्य हो या फिर मेडिकल एजुकेशन को सबकी पहुंच में रखने के प्रयास, इससे आने वाले 10 साल में देश को रिकॉर्ड संख्या में नए डॉक्टर मिलने वाले हैं।”
बीते सालों में हेल्थ सेक्टर की तमाम योजनाएं इसी प्रेरणा से लाई गई
बीते सालों में हेल्थ सेक्टर की तमाम योजनाएं इसी प्रेरणा से लाई गई हैं। इससे देश के हेल्थ सेक्टर को अत्यधिक मजबूती मिलेगी। कोरोना वायरस से उत्पन्न वैश्विक महामारी का यह तीसरा साल है। इस दौरान हमने भारत के लोगों की लोकतांत्रिक मूल्यों में अगाध आस्था, अनुशासन और कर्तव्य-परायणता को और मजबूत होते देखा है। दरअसल, इस कालखंड में देश में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए। सबसे खास परिवर्तन जिस पर पूरी अर्थव्यवस्था की टिकी नजर आ रही थी वह थी देश की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था। इस अवधि में सभी को यह बात क्लियर हो गई की देश का स्वास्थ्य ही देश का भविष्य है। यदि इसमें कोई कोताही बरती तो हम अपना आने वाला कल खो देंगे। ऐसे में भारत सरकार ने अपनी कमर कस ली और देश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर वह कीर्तिमान स्थापित किया जो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया।

भारत ने ”दुनिया का डॉक्टर” बनकर असंख्य लोगों के जीवन की रक्षा की
देश के प्रत्येक नागरिक ने मुश्किल की घड़ी में एक होकर कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आज भारतवासियों की यह संकल्प शक्ति, भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए असीम विश्वास पैदा करती है। दुनिया को अब लगने लगा है कि विशाल जनसंख्या वाले देश में भी महामारियों को फैलने से रोका जा सकता है। केवल प्रबंधन बेहतर होना चाहिए। आज इसी प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार की पीठ पूरी दुनिया थपथपा रही है। भारत ने न केवल अपने देश में इस महामारी को फैलने से रोका बल्कि पूरी दुनिया के तमाम देशों की भी हर संभव मदद की। ऐसे में यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि कोरोना महामारी के दौर में भारत ने ”दुनिया का डॉक्टर” बनकर असंख्य लोगों के जीवन की रक्षा की।

देश के पास रक्षा-कवच
‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मंत्र से शुरू कर भारत ने ”वसुधैव कुटुम्बकम” के अपने मूल संस्कार से दुनिया को परिचित कराया। इस बीच कई राष्ट्रों के भारत के साथ भविष्य के लिए रिश्ते मजबूत हो गए। आज देश में 186 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन डोज लगाने का रेकॉर्ड पार कर लिया गया है। आज हम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज देने वाले अग्रणी देशों में से एक हैं। इस अभियान की सफलता ने देश को एक ऐसा रक्षा-कवच दिया है जिससे हमारे नागरिकों की सुरक्षा भी बढ़ी है और उनका मनोबल भी बढ़ा है।

अब तक देश में कुल 8 वैक्सीन्स को emergency use के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। भारत में बन रही तीन वैक्सीन्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से आपात स्थिति में उपयोग की मंजूरी भी मिली है। भारत में बन रही ये वैक्सीन्स पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

देश के प्रयास केवल तात्कालिक चुनौतियों तक सीमित नहीं
हमारे देश के प्रयास केवल तात्कालिक चुनौतियों तक सीमित नहीं हैं। इसीलिए, मेरी सरकार ऐसे दूरदर्शी समाधान तैयार कर रही है जो भविष्य के लिए भी प्रभावी और उपयोगी रहें। सरकार द्वारा 64 हजार करोड़ रुपए की लागत से शुरू किया गया प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इनफ्रास्ट्रक्चर मिशन इसका एक सराहनीय उदाहरण है। इससे न केवल वर्तमान की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले संकटों के लिए भी देश को तैयार किया जा सकेगा।

80 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस
80 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान भारत कार्ड से गरीबों को इलाज में बहुत मदद मिली है। सरकार ने 8000 से अधिक जन-औषधि केंद्रों के माध्यम से कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराकर, इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया है। सुलभ और सुगम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उठाया गया ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ भी एक बड़ा कदम है।

भारतीय फार्मा सेक्टर ने अपनी श्रेष्ठता को किया साबित
कोरोना काल में भारतीय फार्मा सेक्टर ने भी अपनी श्रेष्ठता को साबित किया है। वर्तमान समय में भारतीय फार्मा कंपनियों के उत्पाद 180 से ज्यादा देशों में पहुंच रहे हैं। लेकिन इस क्षेत्र में भारत के लिए संभावनाएं कहीं अधिक व्यापक हैं। फार्मा इंडस्ट्री के लिए सरकार द्वारा घोषित PLI स्कीम से इन संभावनाओं को विस्तार मिलेगा और रिसर्च को भी गति मिलेगी।

वहीं योग, आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2014 में देश से 6,600 करोड़ रुपए के आयुष उत्पादों का निर्यात होता था, जो आज बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। दुनिया के सबसे पहले ‘WHO Global Centre of Traditional Medicine’ की स्थापना भी भारत में होने जा रही है। कोरोना से लड़ाई के लिए स्किल इंडिया मिशन के तहत हेल्थ केयर से जुड़े 6 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनसे हेल्थ केयर सेक्टर को मदद मिल रही है।

गरीब को सस्ता और उत्तम इलाज होगा सुलभ
आयुष्मान भारत योजना और जन औषधि योजना से हर साल गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के लाखों करोड़ रुपए इलाज में खर्च होने से बच रहे हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन से मरीजों की सुविधाएं और बढ़ेगी।

सस्ती कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की केंद्र की प्रतिबद्धता
गौरतलब हो, सस्ती कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देश की जनता को समय पर उपलब्ध हो इसके लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। यही कारण है कि उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

देश में आज दर्जनों एम्स
देश में आज दर्जनों एम्स के साथ अनेक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। देश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण का लक्ष्य हो या फिर मेडिकल एजुकेशन को सबकी पहुंच में रखने के प्रयास, इससे आने वाले 10 साल में देश को रिकॉर्ड संख्या में नए डॉक्टर मिलने वाले हैं। बता दें बीते शुक्रवार को ही पीएम मोदी ने गुजरात के भुज में केके सुपर स्पेशियलिटी नामक अस्पताल को राष्ट्र को समर्पित किया है। यह अस्पताल भुज में लोगों को सस्ती कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराएगा।

उत्तम इलाज की होगी गारंटी
200 बेड का यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कच्छ के लाखों लोगों को सस्ती और बेहतरीन इलाज की सुविधा देने वाला है। ये हमारे सैनिकों, अर्धसैनिक बलों के परिवारों को और व्यापार जगत के अनेक लोगों के लिए भी उत्तम इलाज की गारंटी बनकर सामने आने वाला है। ऐसे अनेक अस्पताल आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की दशा और दिशा सुधारने का महान कार्य कर रहे हैं।

बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ बीमारी के इलाज तक ही सीमित नहीं
केंद्र सरकार ने देशवासियों की तमाम जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक नागरिक का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करना अपनी टॉप लिस्ट में रखा है। दरअसल सरकार भली-भांति जानती है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ बीमारी के इलाज तक ही सीमित नहीं होती हैं, यह सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित करती हैं। जब किसी गरीब को सस्ता और उत्तम इलाज सुलभ होता है, तो उसका व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है और केंद्र सरकार लोगों के बीच में यही विश्वास कायम करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

आधुनिक और क्रिटिकल हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तैयार
केंद्र सरकार के प्रयासों से आने वाले दिनों में आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन से मरीजों के लिए सुविधाएं और बढ़ेंगी। वहीं आयुष्मान हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के माध्यम से आधुनिक और क्रिटिकल हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को जिला और ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इससे दूर-दराज के इलाकों में भी लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मुहैया हो सकेगी। ऐसे होने पर लोगों को इलाज के लिए शहर की ओर नहीं भागना पड़ेगा। पहले आलम यह हुआ करता था कि छोटी-छोटी बीमारियां भी इलाज के अभाव में इन क्षेत्रों में विकराल रूप ले लेती थी और कई लोग मारे जाते थे। लेकिन बीते कुछ साल में वर्तमान सरकार ने इस स्थिति में सुधार लाने के अपने प्रयास तेज किए हैं। इसके सकारात्मक परिणाम आज हम सभी के सामने हैं। गरीब को आज देश में नि:शुल्क इलाज के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा भी प्राप्त हो रहा है।
(PBNS)

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